रायगढ़। जिले में एक बार फिर हाथी शावक की मौत का मामला सामने आया है। आज सुबह खरसिया वन परिक्षेत्र के गुर्दा और देहजरी गांव के बीच मांड नदी के संगम क्षेत्र में एक हाथी शावक का शव पानी में तैरता मिला। ग्रामीणों ने शव को देखकर इसकी सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद विभागीय अमला मौके पर पहुंचा और आगे की कार्रवाई शुरू की गई।
जानकारी के अनुसार, रविवार रात छाल वन परिक्षेत्र की ओर से करीब 52 हाथियों का दल खरसिया वन परिक्षेत्र में पहुंचा था। अनुमान लगाया जा रहा है कि हाथियों का झुंड पानी पीने अथवा स्नान के लिए मांड नदी के संगम क्षेत्र में आया होगा। बाद में पूरा दल वापस छाल वन परिक्षेत्र लौट गया, लेकिन सोमवार सुबह ग्रामीणों ने नदी में 3 से 5 माह के हाथी शावक का शव देखा।
घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों की सहायता से शावक के शव को पानी से बाहर निकाला। विभाग द्वारा पंचनामा कार्रवाई की जा रही है तथा मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम कराया जाएगा।
25 दिनों में 4 शावकों की मौत
रायगढ़ और धर्मजयगढ़ वन मंडलों में पिछले 25 दिनों के दौरान हाथी शावकों की मौत की यह चौथी घटना है।
- 8 मई को छाल रेंज के सिंघीझाप क्षेत्र स्थित घोघरा डेम में डूबने से लगभग 6 माह के शावक की मौत हुई थी।
- 11 मई को तरकेला गांव के केराझरिया जंगल के डैम में दलदल में फंसने से एक शावक की जान चली गई।
24 मई को आमागुड़ा-पुसल्दा क्षेत्र के तालाब में एक अन्य शावक का शव मिला था।
1 जून को खरसिया वन परिक्षेत्र के गुर्दा और देहजरी के बीच मांड नदी में एक और शावक मृत पाया गया।
लगातार हो रही इन घटनाओं ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि शावक की मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
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