Raigarh News: सरकार बदली, मौसम भी परिवर्तित हुआ फिर जिले के कई धान मंडियों के प्रबंधक भी बदल दिए गए है। जिससे अब किसान धान बेचने के लिए परेशान हो रहे हैं। सरकार बदलने पर समर्थन मूल्य को लेकर किसान अचरज में है, मौसम परिवर्तन होने पर किसानों के धान बारिश में भीग गए हैं,जिससे धान में नमी आ गई है और मंडी के मापदंड के अंदर धान नहीं आ रहा है। जिससे किसानों को धन सुखाने की जरूरत पड़ रही है। कुछ दिनों पूर्व कई धान मंडियों के प्रबंधकों का स्थानांतरण कर दिया गया है, जिस वजह से धान मंडी में अव्यवस्था फैल गई है और किसान परेशान हो रहे हैं। प्रबंधकों के बदलाव होने के कारण किसान और प्रबंधकों में नाराजगी है। कहीं किसान टोकन के लिए भटक रहे हैं तो कहीं असमर्थता जताते हुए प्रबंधकों ने अपने पद से इस्तीफा तक दे डाला है। स्थानांतरित हुए प्रबंधकों ने स्थानांतरण आदेश पर पुनर्विचार करते हुए स्थानांतरण को यथावत करने की मांग भी कलेक्टर से की जा चुकी है, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। जिससे प्रबंधकों में आक्रोश है।
नई सरकार के इंतजार में है किसान
छत्तीसगढ़ में सहकारी समितियों के माध्यम से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 1 नवंबर से जारी है। धान खरीदी को लगभग डेढ़ माह होने को है। लेकिन धान बेचने के लिए खरीदी केंद्रों में किसानों की भीड़ कम दिख रही है। छिटपुट और छोटे किसान अभी धान बेचने के लिए खरीदी केंद्र पहुंच रहे हैं। धान की आवक कम होने की वजह से खरीदी केंद्रों में सन्नाटा पसरा हुआ है। धान खरीदी केंद्रों में सन्नाटा की वजह नये समथर्न मूल्य को माना जा रहा है। क्योंकि विधानसभा चुनाव में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी ने अपने घोषणा पत्र में धान के समर्थन मूल्य में बड़ा इजाफा किया है।
बारिश ने भी डाला बाधा
तूफान की वजह से तीन दिनों तक रुक-रुक कर हुई बारिश ने फसल को खराब कर दिया है। खेतों में खड़ी फसल के साथ काट कर रखी गई फैसलें भी भीग गई है। मिजाई के बाद किसानों के ब्यारे में रखे गए धान भी भीग गए हैं, जिससे धन में नमी बढ़ गई है। नमी की वजह से सहकारी समितियों में धान लेकर आ रहे किसानों को निराश होकर वापस लौटना पड़ रहा है। बारिश की वजह से धान मंडियों के परिसर भी भीग गए हैं, जिससे वाहनों के पहिए भी दब रहे हैं। वाहनों के पहियों में दबने के कारण जमीन में गड्ढे बन रहे है। जिससे आगामी दिनों में धान की बोरी खींचने में परेशानी होगी और धन की बोरी फट जाएगी। स्थिति को देखते हुए प्रबंधकों के द्वारा धान लेने से मना भी किया जा रहा है।
प्रबंधकों के स्थानांतरण से आ रही समस्या
हमालों की समस्या : नये समिति में धान खरीदी कार्य एवं ट्रक लोडिंग हेतु हमालों की व्यवस्था नही हो पा रही है, पहले के कर्मचारीगण स्थानीय होने के कारण अपने जान परिचय वालों से हमाल की ब्यवस्था कर ले रहे थे, परन्तु नये स्थान होने के कारण व्यवस्था नही कर पा रहे हैं। जिसके कारण धान खरीदी एवं परिवहन में भारी समस्या हो रही है, इस वर्ष गत् वर्षों से अधिक धान की खरीदी होनी है, जिससे अधिक हमाल की जरूरत पड़ेगी जो व्यवस्था नही कर पा रहे हैं।
आर्थिक परेशानी : सभी कर्मचारी अपने अपने समिति द्वारा निर्धारित वेतन पर ही कार्य कर रहे हैं। वेतन कम होने के कारण प्रबंधक अपने अपने घर से ही आना जाना करके कार्य करते हैं। जिसके कारण अल्प बेतन पर कार्य कर पाते हैं। अन्य समिति में कार्य करने पर खर्च अधिक होने के कारण आर्थिक परेशानी हो रही है।
धान चोरी होने का खतरा: नये समिति में कार्य करने पर नये कर्मचारी एवं नये हमालों के साथ कार्य करना पड़ रहा है। जिसके कारण धान चोरी होने का पूर्ण सम्भावना है। जिसके कारण अंत में धान का स्टाक कम होने से पूर्ण परिदान करने एवं शून्य प्रतिशत शॉर्टेज करने में परेशानी होगी।
स्वास्थगत समस्या: प्रबंधकों ने बताया कि कई कर्मचारी सूगर, बी.पी. जैसे कई बीमारियों से ग्रसित है, जो अपने घर से कार्य करने पर सुविधा हो रही थी बाहर में कार्य करने से बिमारी बढ़ने की खतरा है।
खरीदी की अन्य ब्यवस्था में परेशानी :- नये समिति में हमाल के अतिरिक्त अन्य व्यवस्था जैसे कर्मचारी चौकीदार, डनेज, रख रखाव इत्यादि में भी परेशानी हो रही है।
क्या कहते है अध्यक्ष
सहकारी समिति के कर्मचारीयों का स्थानांतरण कर दिए जाने के बाद कार्य करने में काफी परेशानी हो रही है। कार्य करने में असमर्थता जताते हुए तीन प्रबंधकों ने अभी तक इस्तीफा दे दिया है। सहकारिता अधिनियम में किसी जगह ऐसा उल्लेख नहीं है कि सहकारी समिति के कर्मचारी का कहीं अन्य जगह स्थानांतरण किया जाए। यह समझ से परे है। स्थानांतरण का जो क्राइटेरिया निर्धारित किया गया है जो कि गलत है। उसमें समिति के कर्मचारी कहीं पर भी गलत नहीं है। इसलिए उक्त स्थानांतरण आदेश निरस्त होना चाहिए।
अरुण बेहरा, सहकारी कर्मचारी संघ जिला अध्यक्ष रायगढ़










