Raigarh News : मुड़ागांव पेड़ कटाई मामला! फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव बनाने वाले के खिलाफ कार्यवाही की मांग, कलेक्टर से मिले प्रभावित ग्रामीण !

Raigarh News: महाजेंको कंपनी के लिए तमनार क्षेत्र के मुड़ागांव में अडानी समूह द्वारा किए गए जंगल कटाई का विरोध लगातार होता जा रहा है। प्रभावित ग्रामीण ने फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव बनाकर अवैध तरीके से पेड़ों की कटाई किए जाने का आरोप लगाया है, क्षेत्रीय ग्रामीणों द्वारा आज कलेक्टर से मुलाकात कर चर्चा की गई, जहां उन्होंने लिखित तौर पर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव बनाने वाले के खिलाफ उचित जांच कर FIR दर्ज करते हुए कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

ग्रामीणों के द्वारा कलेक्टर को दिए गया ज्ञापन में बताया गया है की ग्राम मुड़ागांव भारत के संविधान के अनुच्छेद 244 (1) के अनुसार पांचवी अनुसूची क्षेत्र है, जहां पेशा कानून लागू है। लेकिन अदानी द्वारा जबरन पुलिस बल का प्रयोग कर क्षेत्रीय लोगों की सहमति के बगैर जंगल उजाड़ा गया। जबकि आदिवासी क्षेत्र में पेशा एक्ट लागू होने पर लोगों की सहमति और ग्राम सभा प्रस्ताव के बगैर जल, जंगल,जमीन में कुछ भी नया कार्य की शुरुआत नहीं की जा सकती है। ग्रामीणों ने बताया है कि शासन के द्वारा मुड़ागांव के लगभग 75 एकड़ वनभूमि को कोयला खनन करने हेतु गारे पेलमा सेक्टर -2 महाजेंको कंपनी को आवंटित है। जिसका एमडीओ अदानी कंपनी है, जिसका विरोध ग्रामीण शुरू से ही करते आ रहे हैं।

ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि जिस 75 एकड़  वन भूमि को कोयला खनन करने हेतु आवंटित किया गया है, उस भूमि का मुड़ागांव ग्रामसभा को वन अधिकार मान्यता कानून के तहत सामुदायिक वन अधिकार पट्टा प्राप्त है।

कभी नहीं दिए गांव से ग्राम सभा का प्रस्ताव

प्रभावित ग्रामीणों का कहना है कि उक्त परियोजना के लिए मुड़ागांव के लोगों के द्वारा ग्राम सभा प्रस्ताव कभी पारित नहीं किया गया है, लेकिन अदानी समूह द्वारा फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव के जरिए जंगल को उजाड़ा गया। ग्रामीण ने फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव बनाने वाले के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है।

जनसुनवाई का क्षेत्रवासियों ने किया था पुरजोर विरोध

ज्ञापन में बताया गया है कि इस परियोजना के लिए 27/ 9 / 2019 को पर्यावरणीय  स्वीकृति हेतु जनसुनवाई कराई गई, जिसका मुड़ागांव के ग्रामवासी सहित क्षेत्रवासियों के द्वारा पुरजोर विरोध किया गया था। इसके बाद ग्रामीणों के द्वारा उस  पर्यावरणीय स्वीकृति को निरस्त कराने के लिए एनजीटी में याचिका दायर किया गया।  जिस पर एनजीटी ने उस पर्यावरणीय स्वीकृति को निरस्त कर दिया।

अमृत लाल ( सरपंच,सराइटोला)
ज्ञापन की कापी

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