Raigarh News: घरघोड़ा-तमनार मार्ग पर प्रतिबंधित भारी वाहनों के पहिये थमते नहीं दिख रहे हैं। ग्रामीणों के विरोध, एसडीएम को ज्ञापन, थाना प्रभारियों को सूचना देने के बाद भी भारी वाहनों की रेलमपेल बदस्तूर जारी है। बता दें कि प्रभावित ग्रामीणों के अलावा सड़क से होकर गुजरने वाले अधिवक्ताओं द्वारा भी गाड़ियों पर कार्यवाही व आवागमन बंद कराने को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की जा चुकी है। लेकिन आज भी प्रशासनिक अमला को मुंह चिढ़ाती भारी वाहन प्रतिबंधित मार्ग से होकर गुजर रही है। भारी वाहनों के आवागमन बंद नहीं होने पर अब सिस्टम पर सवाल उठने लगा है। सरकारी तंत्र पर ट्रांसपोर्टर के दबाव में आमजन की आवाज को कुचलने का आरोप लगा है। आज एक बार फिर ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर घरघोड़ा नवापारा शहर के भीतर से गुजर रही भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है। वहीं ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि 24 घंटे के भीतर भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रशासन प्रतिबंध नहीं लगाती है, तो धरना प्रदर्शन, आंदोलन किया जाएगा। जिसकी संपूर्ण जवाबदारी शासन- प्रशासन की होगी।
ट्रांसपोर्टरों के पक्ष में प्रशासन
ज्ञापन में बताया गया है कि घरघोड़ा रेलवे साइडिंग में अदानी खदान का कोयला लेकर भारी वाहन ट्रेलर घरघोड़ा तमनार मार्ग का उपयोग कर दिन रात फर्राटे से चल रही है। जिसके कारण घरघोड़ा व 4 गांव के निवासी प्रभावित हो रहे हैं। भारी वाहनों के लिए बाईपास सड़क का निर्माण किया गया है। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के कारण ट्रेलर शहर के अंदर प्रवेश कर रही है। कई बार आमजन व ग्रामीणों द्वारा इसका विरोध किया गया,परंतु प्रशासन ट्रांसपोर्टरों के पक्ष में रहते हुए वाहनों को चलने दे रही है। पूर्व में प्रशासनिक अधिकारियों से जानकारी प्राप्त हुई थी कि साइडिंग में कोयला पहुंचाना आवश्यक है, अभी पूंजीपथरा मुख्य मार्ग खराब है,जिस वजह से कुछ दिनों के लिए शहर के अंदर खाली ट्रेलर रोको चलने दिया जा रहा है।

ट्रांसपोर्टरों के दबाव प्रशासन कुचल रही आमजन की आवाज
प्रशासनिक कमजोरी की वजह से महीनों बीत जाने के बाद भी आज तक पूंजीपथरा सड़क मरम्मत का कार्य नहीं हो पाया है। जिससे शहर गांव के अंदर से भारी वाहनों का प्रवेश लगातार जारी है। जिसका विरोध भी जनता द्वारा लगातार की जा रही है। लेकिन ट्रांसपोर्टरों के दबाव में प्रशासन आम जन की आवाज कुचलने का हर तरह की कोशिश कर रही है। लोकतंत्र में जनता के ऊपर शोषण हो रहा है। भारी वाहनों के चलने से सड़क जर्जर हो रही है, तो वहीं प्रतिदिन सड़क दुर्घटनाओं की आशंका सदैव बनी रहती है।

क्या सरकारी सिस्टम सेट ?
भारी वाहनों के लिए प्रतिबंधित मार्ग होते हुए भी तमनार- घरघोड़ा मार्ग पर अनगिनत भारी वाहन चल रहे हैं। ऐसी बात नहीं है कि सरकारी सिस्टम के नुमाइंदे उक्त सड़क से नहीं गुजर रहे हैं। बल्कि प्रतिदिन पुलिस और प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी भारी वाहनों को देखते हुए मार्ग से गुजर रहे हैं। लेकिन भारी वाहनों पर लगातार कार्यवाही का साहस कोई नहीं जुटा पा रहे। जिसे अब ग्रामीणों के मुंह से यह बात निकलने लगी है कि सरकारी नुमाइंदे सब ट्रांसपोर्टरों के साथ सेठ हैं। ग्रामीण कहने लगे हैं कि ट्रांसपोर्टरों के द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को महादान दिया जा रहा है। जिस वजह से उनकी गाड़ियों को वरदान प्राप्त है।
कार्यवाही के नाम पर महज खानापूर्ति
ग्रामीणों के द्वारा लगातार विरोध किए जाने के बाद प्रशासनिक अमले ने नाम मात्र के लिए खानापूर्ति करते हुए कुछ गाड़ियों पर चलानी कार्यवाही की है। लेकिन यह कार्यवाही उन ट्रांसपोर्टरों की गाड़ियों पर हुई है,जो सरकारी तंत्र को चढ़ावा नहीं दे रहे है।











